कोल्लेगला। रविवार को कस्बे के कनक सामुदायिक भवन में कुवेम्पु मंत्र मांगल्य रीति से विवाह समारोह संपन्न हुआ।
बैंगलोर में एक कंपनी के कर्मचारी सोमशेखर.एन, गनिगनूर गांव, यालंदूर तालुक, और शिल्पा.एच.बी, पी. होसहल्ली पंचायत पुस्तकालय विभाग, श्रीरंगपटना तालुक की कर्मचारी, ने कुवेम्पु मंत्र मांगल्य पद्धति के अनुसार शादी की।
जिले के वरिष्ठ साहित्य संकनपुरा महादेव ने दुल्हन को मंत्रमांगल्य शपथ और विवाह संहिता सिखाई। इससे पहले उन्होंने दूल्हे के साथ उपस्थित सभी लोगों को भारत के संविधान की प्रस्तावना का उपदेश दिया।
कुवेम्पु ने कहा कि दूल्हे को विवाह संहिता के 20 बिंदुओं का पालन करना चाहिए।
विवाह शास्त्रों, पुरोहितों, घंटियों और मुहूर्तों पर विचार किए बिना व्यावहारिक कुवेम्पु मंत्र मंगल्य विधि से किया गया था।
कुवेम्पु द्वारा निर्मित मंत्र मंगल्य विवाह संहिता जाति, वर्ण, धर्म और परंपरा के अंधविश्वासों से परे संविधान की प्रस्तावना की इच्छाओं का उपदेश देती है।
उन्होंने कहा, बुद्ध, बसव, अंबेडकर और कुवेम्पु के विचार इस विवाह संहिता में निहित हैं।
महादेव शंकणापुरा ने कहा कि आज की महंगी शादियों और अर्थहीन परंपराओं को छोड़कर, ऐसी शादियां अधिक बार होनी चाहिए।
विवाह में मांगल्य, अक्षत, पुष्प पंखुड़ियां सभी मिलती हैं। बुजुर्गों और रिश्तेदारों की इच्छा के अनुरूप कम समय में ही शादी सार्थक ढंग से संपन्न हो गई।
इस विवाह समारोह में दूल्हा-दुल्हन के परिवार के सदस्य, गनिगनूर गांव और पी. होसाहल्ली गांव के स्वामी, साहिथी सुंदर कालीवीरा, दूल्हे के भाई चेतन, मास्टर रघु, रिश्तेदार मौजूद थे।
कोल्लेगाला परिवेश में कुवेम्पु मंत्र मांगल्य पद्धति के अनुसार आयोजित यह पहली शादी थी। आए हुए दूल्हा-दुल्हन के रिश्तेदारों ने भविष्य में भी अपने बच्चों की इसी तरह सादगीपूर्ण शादी कराने की उम्मीद जताई। सभी के लिए दोपहर के भोजन की व्यवस्था की गई थी।
- समाचार
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